श्रीराम-जानकी रामलीला का भव्य शुभारंभ
मुख्य अतिथि अनिल कुमार पाण्डेय ने किया उद्घाटन
रामचरितमानस के आदर्शों को जीवन में उतारें, भगवान श्रीराम का चरित्र हमें प्रेम, त्याग और मर्यादा की देता है सीख : अनिल कुमार पांडेय
मछलीशहर (जौनपुर)। नगर के मंगल बाजार स्थित श्रीराम-जानकी रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं जौनपुर पत्रकार संघ मछलीशहर के अध्यक्ष अनिल कुमार पाण्डेय ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों एवं स्थानीय गणमान्य लोगों ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया।
कार्यक्रम में सभासद एवं अधिवक्ता राजकुमार पटवा उर्फ गोली, रामलीला समिति के अध्यक्ष कमल कुमार भोजवाल, ओमप्रकाश भोजवाल, विजय अग्रहरी एवं राधा रमन अग्रहरि सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सभासद एवं अधिवक्ता राजकुमार पटवा उर्फ गोली ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला महान ग्रंथ है। हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामलीला के विभिन्न पात्रों के चरित्र से शिक्षा लेकर अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
मुख्य अतिथि अनिल कुमार पाण्डेय ने कहा कि रामलीला का आयोजन हमारी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को धर्म, संस्कार और शिक्षा से जोड़ने के साथ ही नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास एवं आदर्शों से परिचित कराते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मर्यादा, त्याग, प्रेम, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श शासन का अनुपम उदाहरण है। श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। माता सीता का धैर्य, लक्ष्मण का समर्पण, भरत का त्याग और हनुमान जी की भक्ति हमें जीवन के अलग-अलग आदर्शों की सीख देती है।
उन्होंने कहा कि रामचरितमानस को यदि हम गहराई से समझें तो यह प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक समरसता का अद्भुत संदेश देने वाला ग्रंथ है। रामलीला केवल मंच पर होने वाला अभिनय नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, बुराई और नकारात्मकता को समाप्त कर अच्छाई की ओर बढ़ने की प्रेरणा है। ऐसे आयोजनों से समाज में संस्कारों का संचार होता है और हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी रहती हैं।
अंत में उन्होंने रामलीला समिति के सभी पदाधिकारियों एवंद आयोजकों को इस सांस्कृतिक आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को केवल मंच तक सीमित न रखकर अपने व्यवहार और जीवन में उतारना ही रामलीला की वास्तविक सार्थकता है।