मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सपा का प्रदर्शन, तहसील में फूंका सांकेतिक पुतला*
प्रदेश मे हुए अखिलेश यादव की गिरफ़्तारी की खबर पर तहसील में धरने पर बैठे कार्यकर्ता, महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा*
लम्भुआ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ समाजवादी पार्टी के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत मंगलवार को लम्भुआ में भी सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
सपा कार्यकर्ता मेला वाली बाग से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए तहसील मुख्यालय लम्भुआ पहुंचे। प्रदर्शन में विधानसभा अध्यक्ष सतपाल यादव, शारदा जितेन्द्र वर्मा (बाजीगर), पृथ्वी पाल यादव, अधिवक्ता हरकेश यादव, हरीश यादव, मुलायम यादव, सल्लाउद्दीन सहित पार्टी के तमाम पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे। महिला जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
तहसील परिसर में पहुंचने के बाद कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सांकेतिक पुतला फूंका। पुतला जलने सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई । इस दौरान तहसील परिसर में कुछ देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।
इसी बीच दिल्ली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर प्रदर्शनकारियों तक पहुंची। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओ ने कड़ी धूप मे ही तहसील परिसर में नीचे बैठ गए और विरोध जताने लगे। कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद महिलाओं ने भी धरने में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर पार्टी लगातार सवाल उठा रही है। इसी मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मंगलवार को दिल्ली में भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ मार्च निकाला, जिसके दौरान अखिलेश यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया। जिला समाजवादी पार्टी सैनिक प्रकोष्ठ श्याम बहादुर यादव ने कहा जबतक हमारे नेता की रिहाई नहीं होंगी तभी तक हम यही बैठे रहेंगे, कार्यकर्ताओ ने हजारों की भीड़ मे इकठ्ठा हो कर नारेबाजी करते हुए कहा की सरकार और निर्वाचन आयुक्त एक है, जितेन्द्र वर्मा बाजीगर ने कहा की निर्वाचन आयुक्त स्वतंत्र होना चाहिए लेकिन अपने फायदे के लिए सरकार ने निर्वाचन आयोग को अपने ही इसारे पर रखा और निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेंश कुमार सरकार की कठपुतली की तरह काम किये और यदि इन्हे हटाया ना गया तो निर्वाचन की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी
