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श्रीमद्भ भागवत कथा के पूर्व निकली भव्य कलश यात्रा

जय श्री कृष्ण के नारे से गूंजा पूरा क्षेत्र ,कथा श्रवण से प्रेत योनि से मिलती है मुक्ति:- नवल किशोर महाराज

सिगरामऊ (जौनपुर)। क्षेत्र के जमऊपट्टी ग्राम पंचायत में पितृ मुक्ति के उद्देश्य से मिश्रा परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिवस अयोध्या धाम से पधारे परम पूज्य कुलगुरु एवं कथा व्यास कौशल किशोर महाराज तथा कुल पुरोहित गिरजा शंकर तिवारी के नेतृत्व में गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। खराब मौसम के कारण कलश यात्रा सीमित दूरी तक ही निकाली जा सकी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

कलश यात्रा के उपरांत कथा व्यास कौशल किशोर महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत महात्म्य का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को प्रेत योनि से भी मुक्ति प्राप्त हो सकती है। भगवान के स्वरूप की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान सत्य, चित और आनंद स्वरूप हैं।

कथा व्यास ने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार तोता मीठे और पके फलों को ही चुनकर खाता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा भी पके हुए आम के समान मधुर, ज्ञानवर्धक और कल्याणकारी है। उन्होंने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धुंधकारी की कथा सुनाई और बताया कि भागवत श्रवण से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

प्रथम दिवस की कथा में महाराज ने कलियुग के आगमन, राजा परीक्षित द्वारा कलियुग को स्थान प्रदान करने तथा उसके राजा परीक्षित के मुकुट में प्रवेश करने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित का स्वर्ण मुकुट परिश्रम की कमाई से अर्जित नहीं था, बल्कि युद्ध में विजय के बाद प्राप्त हुआ था। इसी कारण कलियुग को उसमें प्रवेश का अवसर मिला। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि मेहनत की कमाई से खरीदे गए सोने में कलियुग का वास नहीं होता।

कथा व्यास के ओजस्वी एवं भक्तिमय प्रवचनों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे पंडाल में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। प्रथम दिवस बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु एवं कथा प्रेमी कथा श्रवण के लिए पहुंचे।

इस अवसर पर मिश्रा परिवार की ओर से चिंतामणि मिश्र, मास्टर शिवनारायण मिश्र, रमापति मिश्र, दिनेश कुमार मिश्र, प्रेमचंद्र मिश्र, भानु कुमार मिश्र, मास्टर अरुण कुमार मिश्र, अनिल मिश्र, सुभाष मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, वीरेंद्र मिश्र, राजेश मिश्र, संजय मिश्र, सुरेंद्र मिश्र, पंकज मिश्र, सुरेश मिश्र, अशोक मिश्र, त्रिपुरारीनाथ, विनोद मिश्र, रोहित मिश्र, इंद्रप्रकाश मिश्र, मंगेश मिश्र, उमेश मिश्र, सौरभ मिश्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।