प्रतिबंधित मांझे से फिजियोथेरेपिस्ट की गला कट जाने से हुई मौत,पर‍िवार में छाया मातम

*प्रतिबंधित मांझे से फिजियोथेरेपिस्ट की गला कट जाने से हुई मौत,पर‍िवार में छाया मातम*

अरुण कुमार जायसवाल (जिला ब्यूरो)

जौनपुर: प्रतिबंधित मांझे के कारण ज‍िले में एक और जान चली गई। बुधवार दोपहर को लाइन बाजार के पचहटिया के पास केराकत के शेखजादा मोहल्ले के निवासी फिजियोथेरेपिस्ट समीर की मौत हो गई।जानकारी के अनुसार, समीर किसी मरीज को देखने के लिए जिला अस्पताल आ रहे थे, तभी रास्ते में यह दुखद घटना घटित हुई। घटना की सूचना मिलते ही मृतक के पिता मुकीम और भाई जावेद अस्पताल पहुंचे।

प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने में पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। हाल ही में, कुछ सप्‍ताह पूर्व ज‍िले में एक शिक्षक की भी इसी प्रकार की घटना में मौत हो चुकी है, जब वह अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर घर लौट रहे थे। यह घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि प्रतिबंधित मांझे के उपयोग को लेकर जागरूकता और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

समीर की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, और प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न केवल जानलेवा है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक गंभीर खतरा बन चुका है।

समीर के परिवार में इस घटना से गहरा दुख छा गया है। उनके पिता मुकीम ने कहा कि यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए बड़ी चेतावनी भी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के मांझे की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए। पतंगों की उड़ान ने हादसे भी दे द‍िए हैं।लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं देगा, तो आने वाले समय में और भी जानें जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में इस विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इस खतरे को समझ सके।

इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए भी अत्यंत खतरनाक है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता है। समीर की मौत ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं या नहीं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

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