किसानों पर मौसम की मार के साथ छुट्टा पशुओं और जंगली जानवरों का दोहरा कहर*
झटका मशीनों पर रोक से किसानों की बढ़ी परेशानी, आखिर अपनी फसलों की सुरक्षा कैसे करें अन्नदाता**
सिगरामऊ/जौनपुर।** किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ मौसम के अचानक बदले मिजाज, बेमौसम बारिश और ठंडी हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, तो दूसरी तरफ छुट्टा पशुओं, नीलगाय और जंगली जानवरों का आतंक उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है। खेतों में खड़ी फसलों को जानवर खाकर और रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे में अन्नदाता किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष बेमौसम बारिश के चलते खेतों में तैयार धान की फसल को भारी नुकसान हुआ था। कई खेतों में कटी हुई धान की फसल बारिश के पानी में भीगने के कारण वहीं अंकुरित हो गई थी। इस वर्ष भी मौसम का मिजाज पिछले साल जैसा होने की आशंका से किसान सहमे हुए हैं।
वहीं, जिन किसानों ने आलू, चना और मटर की बुवाई कर दी है, उन्हें बारिश और खेतों में बढ़ती नमी के कारण बीजों के जमाव पर प्रतिकूल असर पड़ने की चिंता सता रही है। किसानों को आशंका है कि मौसम का यही हाल बना रहा तो रबी की फसलों की शुरुआती बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, छुट्टा पशुओं और नीलगाय से फसलों को बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि एक तरफ झटका मशीनों के इस्तेमाल पर रोक है, वहीं दूसरी तरफ फसलों की सुरक्षा के लिए कोई कारगर विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
ऐसे में किसानों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर वे अपनी खून-पसीने की कमाई से तैयार फसलों को कैसे बचाएं? किसानों ने संबंधित अधिकारियों और शासन-प्रशासन से छुट्टा पशुओं तथा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की है।