शिक्षाविद्, समाजसेवी व राजनीतिज्ञ राजर्षि श्रीपाल सिंह की 17वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

*शिक्षाविद्, समाजसेवी व राजनीतिज्ञ राजर्षि श्रीपाल सिंह की 17वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब*

*वस्त्र वितरण कर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि*

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*संवाद: शिवपूजन मिश्रा*

सिंगरामऊ। सिंगरामऊ रियासत के राजा हरपाल सिंह के पुत्र, शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं राजनीतिज्ञ स्वर्गीय राजर्षि श्रीपाल सिंह की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को गौरीशंकर मंदिर, सिंगरामऊ में वस्त्र वितरण एवं सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति से जनसैलाब उमड़ पड़ा।

कार्यक्रम का शुभारंभ राजर्षि श्रीपाल सिंह की पौत्रवधू एवं ठाकुरबारी महिला विकास कल्याण समिति की संस्थापिका डॉ. अंजु सिंह तथा अतिथि के रूप में उपस्थित महेंद्र शुक्ला शास्त्री द्वारा दीप प्रज्वलन एवं राजर्षि साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।

 

इस अवसर पर महेंद्र शुक्ला शास्त्री ने कहा कि राजर्षि श्रीपाल सिंह केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, संपादक एवं शिक्षाशास्त्री भी थे। शिक्षा के प्रचार-प्रसार एवं शैक्षिक संस्थानों के निर्माण से उनके समाज के प्रति जागरूकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का स्पष्ट प्रमाण मिलता है। उन्होंने कभी लोकप्रियता की राजनीति नहीं की, बल्कि नीति को लोकहित से जोड़ते हुए समाज को शिक्षित, संगठित एवं जागरूक करने में आजीवन लगे रहे। स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को गढ़ने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

डॉ. अंजु सिंह ने राजर्षि श्रीपाल सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 29 जुलाई 1918 को हुआ था तथा 1939 में उनका राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने कहा कि बाबा हजूर ने सदैव गरीब, किसान, मजदूर एवं वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्हीं आदर्शों पर चलते हुए वे स्वयं भी जनता की सेवा के लिए समर्पित हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार और संस्था भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक कार्य निरंतर करती रहेगी।

 

कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। संस्था द्वारा जरूरतमंदों को 200 से अधिक नए कंबल एवं विभिन्न प्रकार के वस्त्र वितरित किए गए। इस पहल से ठंड के मौसम में कई गरीब परिवारों को राहत मिली। स्थानीय लोगों ने इस कार्य की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी कदम और राजर्षि श्रीपाल सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

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