*भारी तपन के बावजूद उमड़ा आस्था का जन सैलाब ली आदिगंगा में डुबकी*

*भारी तपन के बावजूद उमड़ा आस्था का जन सैलाब ली आदिगंगा में डुबकी*

 

अशोक कुमार वर्मा

 

*लम्भुआ सुल्तानपुर*

सुल्तानपुर जनपद के लम्भुआ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल धोपाप धाम में लाखों स्नानार्थियों ने गोमती में स्नान किया तथा मंदिर में दर्शन कर पूजन किया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जेष्ठ माह की शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा पर्व पर धोपाप में भक्तों के अपार भीड़ पहुंची और स्नान की। चप्पे चप्पे पर पुलिस की सुरक्षा को लेकर नजर थी । एसडीएम गामिनी सिंगला तथा सीओ अब्दुस सलाम के नेतृत्व में पुलिस टीम पूरे मेले में नजर बनाई हुई थी। भक्तों ने मेले में गोदान, अन्न दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्री राम जानकी मंदिर में भक्तों ने पूजा अर्चना की। नदी में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने गोताखोरों तथा एसडीआरएफ की टीम को लगाया था। महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए अस्थाई रूप से पुलिस ने व्यवस्था की थी। इसके अलावा कई थानों की फोर्स लगाई गई थी। मेले में मरीजों के लिए स्वास्थ्य कैंप की व्यवस्था की गई थी। भक्तों के लिए जगह-जगह लोगों ने शरबत तथा भंडारे का आयोजन किया था। व्यापारी नेता रविंद्र त्रिपाठी ने धाम में भक्तों के लिए बूंदी के प्रसाद की व्यवस्था की थी। धाम से लगभग 2 किलोमीटर पहले ही बड़े वाहनों को पुलिस ने रोक दिया था। मंदिर परिसर में काफी संख्या में महिला चेन स्नेचरो को पुलिस ने पकड़ लिया। वहीं स्नान के दौरान राय बिगो निवासी आकाश चौरसिया पुत्र उमाशंकर चौरसिया उम्र 20 वर्ष जो अपने दोस्तों के साथ धोपाप धाम दशहरा स्नान करने आया हुआ था स्नान के दौरान गहराई में जाने के कारण युवक की डूबने से अचेत अवस्था में चला गया जहां डॉक्टर से मृत घोषित कर दिया।

 

*धोपाप में स्नान का महत्व*

 

जिले के पौराणिक व धार्मिक महत्व वाला तीर्थस्थल धोपाप त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के आगमन से चर्चित हुआ है। रावण वध के उपरांत ऋषियों की सलाह पर भगवान श्रीराम ने धोपाप में ही आदि गंगा गोमती के तट पर डुबकी लगाकर पाप से मुक्ति पाई थी। तभी से इस स्थान का नाम धोपाप पड़ गया। प्रत्येक वर्ष गंगा दशहरा के पर्व पर करीब एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु सिर्फ स्नान के जरिए पापों से मुक्ति की चाह में धोपाप पहुंचते हैं।

मान्यता है कि लंकापति रावण वध के उपरांत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को ब्रह्महत्या के पाष का दोषी माना गया था। इसके लिए उनके कुलगुरु ने अन्य ऋषियों की मदद ली थी। काफी मंथन के बाद ऋषियों की सलाह पर एक पत्ते पर काला कौआ नदियों में तैराया गथा था। आदि गंगा गोमती के इस स्थान पर पहुंच कर वह कौआ सफेद हो गया था। इससे इस स्थान को स्नान के उपयुक्त माना गया था। प्रभू श्रीराम ने इस स्थान पर स्नान करके ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। तभी से इस स्थान का नाम धोपाप पड़ गया। जिस घाट पर श्रीराम ने स्नान किया था, उसे राम घाट के नाम से जाना जाता है पापमुक्त होने की चाह में श्रद्धालु इस स्थान पर पहुंच कर स्नान करते हैं।

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