*सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लम्भुआ में कर्मचारियों का नहीं है आवास*
अशोक कुमार वर्मा
*लम्भुआ सुल्तानपुर*
लम्भुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विगत 6 माह पूर्व जर्जर इमारत को धवस्त करने का शासनादेश जारी हुआ था ठेकेदार ने बिल्डिंग को मजदूरों की मदद से बिल्डिंग का
ध्वस्तीकरण शुरू किया ध्वस्तीकरण के काम में लगभग दो माह का समय लगा ठेकेदार के द्वारा ईटों को सही सलामत निकाल लिया गया और अस्पताल की जमीन पर तह लगाकर रख दिया गया और सामग्री को वही छोड़ दिया गया ना ही जमीन की साफ सफाई हुई और ना ही जमीन पर पड़ी ईटों को हटाया गया बल्कि एक बोर्ड और लगा दिया गया की पुरानी ईंटें बिकाऊ है
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर कब तक अस्पताल का कर्मी जिनके रहने सहने की कोई व्यवस्था नहीं है आपातकाल स्थिति में वहां रहने वाला स्टाफ कहीं दूर रहने लगा जिन कारणों से स्टाफ के साथ-साथ मरीज को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है
मकान की शक्ल तो गायब ही हो गई वही साथ-साथ स्टाफ की भी परेशानियां बढ़ती गई जिन कारणों से दिनचर्या बाधित होती है इस विषय वस्तु को सुधारने के लिए अधिकारीगण कब ध्यान देंगे और यह अव्यवस्था व्यवस्था में कब परिवर्तित होगी यह व्यवस्थाएं कब अमली जामा पहनेगी और कर्मचारियों को आवासीय सुबिधायें मिल सकेगीं इसके लिए कोई निर्धारण नहीं किया गया बड़ी अजब की बात है टूटी हुई बाउंड्री वॉल होने के कारण आवारा पशुओं का आवागमन लगा रहता है कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावनाएं बनी रहती हैं जर्जर बाउंड्री बाल बनना आवश्यक के साथ-साथ जरूरी भी है और मजबूरी भी है बिल्डिंग को संमतलीकरण करने के बाद उसका मालवा भी हटाया जाना आवश्यक था जिसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है कि वह कब हटाएगा और कब तक आवास का निर्माण होगा
