बिना बुलावे पिता, गुरु और सच्चे मित्र के घर जाना उचित : धर्मराज महाराज

बिना बुलावे पिता, गुरु और सच्चे मित्र के घर जाना उचित : धर्मराज महाराज

 

संवाददाता : शिवपूजन मिश्रा

सिगरामऊ। क्षेत्र के डंडारी गांव में मुख्य यजमान वंश गोपाल उपाध्याय (दादा) के आवास पर आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास परम पूज्य धर्मराज महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिता, गुरु और सच्चे मित्र के यहां जाने के लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। इन संबंधों की नींव प्रेम, श्रद्धा और आत्मीयता पर टिकी होती है। उन्होंने कहा कि जहां सम्मान और अपनापन हो, वहां औपचारिक निमंत्रण का महत्व नहीं रहता, लेकिन हर परिस्थिति में मर्यादा का पालन आवश्यक है।

प्रवचन के दौरान धर्मराज महाराज ने माता सती और राजा दक्ष के यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि माता सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए माता सीता का रूप धारण किया, जिससे भगवान शिव अप्रसन्न हो गए। बाद में राजा दक्ष ने कनखल में भव्य यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया। पिता के मोहवश माता सती यज्ञ में पहुंचीं, जहां राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया और यज्ञ में उनका भाग भी नहीं रखा। इससे आहत होकर माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।

उन्होंने बताया कि यह समाचार मिलने पर भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र और भद्रकाली को उत्पन्न कर दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कराया। बाद में देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने राजा दक्ष को जीवनदान देते हुए उनके धड़ पर बकरे का सिर स्थापित किया। अपनी भूल का एहसास होने पर राजा दक्ष ने भगवान शिव से क्षमा याचना की।

 

धर्मराज महाराज ने बालक ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा उत्तानपाद की बड़ी रानी सुनीति के पुत्र ध्रुव को उनकी सौतेली माता सुरुचि ने पिता की गोद से उतार दिया। माता सुनीति की प्रेरणा से मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव वन चले गए, जहां देवर्षि नारद ने उन्हें “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की दीक्षा दी। कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए। ध्रुव ने सांसारिक सुख-संपत्ति नहीं, बल्कि प्रभु भक्ति का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने उन्हें दीर्घकाल तक धर्मपूर्वक राज्य करने तथा मृत्यु के उपरांत ध्रुव तारा के रूप में अमर होने का आशीर्वाद प्रदान किया।

 

धर्मराज महाराज ने कहा कि अहंकार मनुष्य के विनाश का कारण बनता है, मोह विवेक को नष्ट करता है, जबकि गुरु की आज्ञा का पालन, भगवान में अटूट विश्वास और सच्ची भक्ति मनुष्य को जीवन में सर्वोच्च स्थान दिलाती है।

 

इस अवसर पर राजकुमार उपाध्याय, आशीष मिश्र, विमल मिश्रा, धीरज उपाध्याय, ऋतिक उपाध्याय, आदर्श, उत्कर्ष, टिंकू, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, अशोक शुक्ला, प्रभाकर शुक्ला, हृदयनारायण शुक्ला, भारत मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, रिंकू, प्रिंसु, टिल्लू, कमलेश मिश्रा, राम पूजन, हिमांशु पांडे, अखिलेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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