कोडीनयुक्त कफ सिरप मामला: जौनपुर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी

*कोडीनयुक्त कफ सिरप मामला: जौनपुर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी*

*सात आरोपियों की संपत्ति होगी फ्रीज*

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*अरुण कुमार जायसवाल (जिला ब्यूरो)*

जौनपुर।

कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में पुलिस और एसआईटी (विशेष जांच टीम) अब जौनपुर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शेष औपचारिकताएं जल्द पूरी होने के बाद एक सप्ताह के भीतर सात आरोपियों की संपत्तियां फ्रीज की जाएंगी।

 

इस संबंध में बुधवार को लखनऊ में विवेचक और एसआईटी से जुड़े अधिकारियों की अहम बैठक भी हुई। जांच में वाराणसी निवासी भोला प्रसाद जायसवाल और उसके पुत्र शुभम जायसवाल की भूमिका सामने आई है, जिनका झारखंड के रांची स्थित शैली ट्रेडर्स के माध्यम से करोड़ों रुपये के कोडीनयुक्त कफ सिरप का अवैध कारोबार पाया गया है।

 

52 करोड़ के अवैध कारोबार का खुलासा

औषधि विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि जौनपुर की करीब 18 फर्मों ने अलग-अलग तिथियों में झारखंड की शैली ट्रेडर्स और सहारनपुर की वान्या इंटरप्राइजेज के जरिए कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई की। इनमें से कई फर्मों का अब कोई पता नहीं है, जबकि कुछ फर्मों ने जिन स्थानों पर सिरप भेजने की बात कही है, उनका विवरण स्पष्ट नहीं है। जांच में लगभग 52 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है।

 

पहला मुकदमा 21 नवंबर को दर्ज

जांच के आधार पर औषधि निरीक्षक ने 21 नवंबर को कोतवाली में पहली बार मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस के अनुसार, इस मुकदमे में कुल 14 नामजद आरोपी थे, जिनमें 12 फर्म संचालक और वाराणसी निवासी भोला प्रसाद जायसवाल व उसका पुत्र शुभम जायसवाल शामिल थे। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर अन्य नाम भी सामने आए।

 

सात आरोपियों की अचल संपत्ति होगी फ्रीज

जांच के दौरान जिन सात आरोपियों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है, उनकी अचल संपत्ति फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इससे पहले पुलिस इनके बैंक खातों को पहले ही फ्रीज कर चुकी है।

 

बांग्लादेश और नेपाल तक पहुंचा नेटवर्क

अब तक की जांच में एसआईटी को यह भी पता चला है कि जौनपुर से कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी बांग्लादेश और नेपाल तक की जा रही थी। बांग्लादेश सीमा पर बरामद सिरप में जौनपुर के बैच नंबर की दवाएं पाई गईं। इसके बाद एसआईटी की टीम ने त्रिपुरा जाकर उस यूनिट का विवरण जुटाया, जहां से यह दवा तैयार हुई थी। इस आधार पर जांच अभी भी जारी है।

 

18 फर्मों के लाइसेंस निरस्त

औषधि विभाग की जांच में जिन 18 फर्मों के जरिए अवैध कारोबार हुआ, उन सभी के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। अब पुलिस की अगली कार्रवाई अचल संपत्तियों को फ्रीज करने और मामले से जुड़े अन्य लोगों पर शिकंजा कसने की है।

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