श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण–रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी निकली

*लक्ष्मी सदैव श्रीहरि विष्णु एवं सुमति के साथ निवास करती हैं : अश्वनी महाराज*

 

*श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण–रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी निकली*

पट्टी नरेंद्रपुर। क्षेत्र के उपाध्याय पुर गांव में परम बड़भागी श्री प्रेमचंद शर्मा के यहां आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। परम पूज्य कथा व्यास अश्वनी महाराज ने श्रीमद् भागवत के हृदयस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, कंस वध सहित उनकी विविध लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर विशेष आकर्षण देखने को मिला। इस अवसर पर कृष्ण–रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी निकाली गई। जैसे ही विवाह का प्रसंग आरंभ हुआ, पंडाल में भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। हरिनाम संकीर्तन, गाजे-बाजे व ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि पुरुष भक्त नृत्य करते हुए आनंद में सराबोर नजर आए।

 

विवाह कार्यक्रम के दौरान आचार्य अरविंद उपाध्याय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संस्कार संपन्न कराया। यजमान परिवार द्वारा भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के चरण पखारकर वर–कन्या पूजन किया गया।

 

इस अवसर पर परम पूज्य अश्वनी महाराज ने कहा कि “समय के साथ विवाह की शैली में अनेक परिवर्तन आए हैं, किंतु सनातन संस्कृति की आत्मा आज भी जीवित और अटूट है।” उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि लक्ष्मी सदैव श्रीहरि भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं और जहां सुमति होती है, वहां अधर्म और अहंकार का स्थान नहीं होता। शिशुपाल जैसे लोगों के साथ लक्ष्मी नहीं ठहरतीं, बल्कि वहां से जाने का मार्ग खोज लेती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से सदैव नारायण अनुरागी होकर लक्ष्मी का पूजन करने का आह्वान किया।

 

कथा के समापन पर भक्तों ने जयकारों के साथ महाराज के प्रवचन को आत्मसात किया और वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया।

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