डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम आते ही भारतीय संविधान का जिक्र अपने आप आ जाता है: शंकर गिरी

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम आते ही भारतीय संविधान का जिक्र अपने आप आ जाता है: शंकर गिरी

 

बाबा साहब ऐसे धर्म को मानते थे जो स्वतंत्रता, समानता और आपसी भाईचारा सिखाता है: रमेश सिंह

बाबा साहेब का मानना था कि जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए: पुष्पराज सिंह

जौनपुर:  भारतीय जनता पार्टी जौनपुर की संगोष्ठी जिला कार्यालय पर डाक्टर भीमराव अम्बेडकर के याद मे आयोजित हुआ जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने की और मुख्य अतिथि प्रदेश मंत्री शंकर गिरी और विशिष्ट अतिथि के रूप मे प्रदेश पंचायत प्रकोष्ठ के संयोजक रमेश सिंह उपस्थित रहे।

सर्वप्रथम पार्टी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर माल्यार्पण किया तथा श्रद्धासुमन अर्पित कर व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

 

मुख्य अतिथि शंकर गिरी ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है। जो शायद ही कहीं और देखने को मिले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम आते ही भारतीय संविधान का जिक्र अपने आप आ जाता है। सारी दुनिया आमतौर पर उन्हें या तो भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका के नाते याद करती है या फिर भेदभाव वाली जाति व्यवस्था की प्रखर आलोचना करने और सामाजिक गैर बराबरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले योद्धा के तौर पर जाने जाते है।

 

विशिष्ट अतिथि रमेश सिंह ने कहा कि बाबा साहब ऐसे धर्म को मानते थे जो स्वतंत्रता, समानता और आपसी भाईचारा सिखाता है। ऐसे हमारे प्रेरणा स्त्रोत थे बाबा साहब जिनको आज पूरी दुनिया याद कर रही है। उन्होंने लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

 

संगोष्ठी में जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने कहा कि अंबेडकर साहब की एक बात हमेशा उनके जेहन में होती है कि वह कहते थे कि यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मो के शास्त्रों की संप्रभूता का अंत होना चाहिए। बाबा साहेब का मानना था कि जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।

 

उक्त अवसर पर राकेश वर्मा, मनोरमा मौर्य, विजय लक्ष्मी साहू सिद्दार्थ सिंह साहित तमाम बुद्धजीवी वर्ग उपस्थित रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *