*लम्भुआ के इसी रास्ते पर दो I A S प्रतिदिन आते जाते हैं फिर भी नज़र में नहीं आता भ्रष्टाचार*
अशोक कुमार वर्मा
*लम्भुआ सुल्तानपुर*
सुल्तानपुर जिले की लम्भुआ तहसील को एक साथ दो आईएएस अधिकारियों की तैनाती मिली जिससे क्षेत्र के किसानों और आम जनता में यह उम्मीद जगी थी कि अब लम्भुआ भ्रष्टाचार-मुक्त होगा और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी। लेकिन महज पाँच महीनों के भीतर ही हालात इसके उलट नजर आने लगे हैं।
नगर पंचायत लम्भुआ द्वारा अधिकारियों के आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से चौकिया रोड से तहसील तक सड़क/रास्ते का निर्माण कराया गया, लेकिन इस निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की गई और मानकों को ताक पर रखकर भुगतान कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने स्पष्ट अनियमितताओं के बावजूद संबंधित अधिकारियों की नजर इस कथित भ्रष्टाचार पर क्यों नहीं पड़ी? क्या यह लापरवाही है या फिर जानबूझकर आंखें मूँद ली गईं—यह चर्चा अब आम लोगों और किसानों के बीच तेज हो गई है। किसानों और नागरिकों का कहना है कि जब दो-दो आईएएस अधिकारियों की मौजूदगी में भी नगर पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं आ पा रही है, तो आम जनता को न्याय की उम्मीद किससे की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराता है या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
जब रोज दिखाई देने वाली सड़क पर अनियमित हो सकती है तो आखिर लम्भुआ जैसी जगह में दो-दो आएएस होने का क्या मतलब भ्रष्टाचार को एक नजर देखने की आवश्यकता है और उस पर कार्रवाई करने की भी आवश्यकता है अन्यथा सरकारी धन की बंदर बांट होती रही है और होती रहेगी इस पर किसी भी प्रकार का अंकुश नहीं लग सकता है खबर एक आईना है जिसको सभी देख सकते हैं दिखाने का प्रयास महज इस वस्ते है कि गलती करने वाला बेखौफ क्यों है और नगर पंचायत ही क्यों तहसील अंतर्गत बहुत सारे गांव है यही कारण है कि उन गांव में होने वाला भ्रष्टाचार अथवा करने वाला आखिर क्यों डरे जब रोज जिस सड़क पर हमारे जिम्मेदार चल रहे हैं वह बेहाल है तो आगे का हाल राम जाने जी राम जी का क्या हाल होगा
