*रामपुर थानाध्यक्ष का कथित ऑडियो वायरल, पत्रकार ने लगाया धमकी और अभद्रता का आरोप*
*******************
*अरुण कुमार जायसवाल (जिला ब्यूरो)*
रामपुर, जौनपुर। रामपुर थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष रमेश कुमार से बातचीत का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पत्रकार सोनू गुप्ता ने आरोप लगाया है कि एक गुमशुदगी के मामले में जानकारी लेने के दौरान थानाध्यक्ष ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और घर से उठाने की धमकी दी।
जानकारी के अनुसार, औरा बनपुरवा गांव निवासी एक युवक की कुछ दिन पूर्व गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसी मामले की जानकारी लेने के लिए पत्रकार ने 23 अगस्त 2026 की शाम करीब पांच बजे रामपुर थानाध्यक्ष से फोन पर संपर्क किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान थानाध्यक्ष ने शाम के समय फोन नहीं करने और सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे के बीच संपर्क करने की बात कही।
पत्रकार का कहना है कि बताए गए समय के अनुसार उन्होंने अगले दिन करीब दोपहर एक बजे दोबारा थानाध्यक्ष को फोन किया। आरोप है कि इस दौरान बातचीत का स्वरूप बदल गया और उन्हें घर से उठाने की धमकी देने के साथ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि फोन पर बातचीत के बाद थानाध्यक्ष पुलिस टीम के साथ उनके घर पहुंचे। वहां मौजूद महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में बातचीत की गई। आरोप है कि महिलाओं को थाने ले जाने और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका जीवन खराब करने की धमकी दी गई।
इस पूरे प्रकरण से जुड़ा कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार और पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज वास्तव में थानाध्यक्ष की ही है या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले में अब सवाल यह उठ रहा है कि वायरल ऑडियो की तकनीकी जांच कब कराई जाएगी और पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कौन करेगा। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह भी महत्वपूर्ण विषय है।
फिलहाल मामले में पुलिस अथवा संबंधित उच्चाधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अधिकारियों की प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
