जिला पंचायत की गौशाला में भारी लापरवाही, एक गाय की मौत, तीन अचेत प्रशासनिक सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

*जिला पंचायत की गौशाला में भारी लापरवाही, एक गाय की मौत, तीन अचेत प्रशासनिक सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल*

दधीच विश्वकर्मा

चांदा (सुल्तानपुर)

 

जिला पंचायत के संरक्षण में संचालित प्रतापपुर कमैचा स्थित गौशाला में भारी अव्यवस्था और लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गौशाला की बदहाल स्थिति के चलते एक गाय की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गायें अचेत अवस्था में पाई गईं। इस घटना ने न सिर्फ पशु संरक्षण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।स्थानीय निरीक्षण के दौरान गौ सेवा दल के जिला अध्यक्ष देवकांत मिश्रा अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। गौशाला में न तो समय पर चारे की व्यवस्था मिली और न ही बीमार व घायल पशुओं के लिए किसी प्रकार की चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध थी। कई गायें घायल अवस्था में पड़ी मिलीं, जबकि देखरेख के लिए नियुक्त केयरटेकर भी मौके से नदारत पाए गए।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रशासन को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही तहसीलदार लंभुआ प्रांजल तिवारी, कोतवाली प्रभारी अमित कुमार मिश्रा और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। मृत गाय को ट्रॉली के माध्यम से ले जाकर दफनाया गया, लेकिन यह कार्रवाई कई बड़े सवाल छोड़ गई।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे और कब से जारी थी? क्या जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों को इस बदहाली की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी? यदि जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?हैरानी की बात यह भी रही कि जब इस पूरे मामले पर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और मौके से निकल गए। इस व्यवहार ने संदेह को और गहरा कर दिया है।स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो हम तुरंत ठोस कदम उठाए गे।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है, और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।

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