*गरीबी में भी ईमान धर्म नहीं छोड़ना चाहिए: अनिलेश शुक्ला महाराज*
*इनामीपुर में श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर विप्र सुदामा की कथा सुनकर श्रोता हुए भावविभोर*
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*संवाद: शिवपूजन मिश्रा*
इनामीपुर। क्षेत्र के इनामीपुर गांव में डॉ. सुरेश तिवारी एवं अनिल तिवारी के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास अयोध्या धाम से पधारे अनिलेश शुक्ला महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति को गरीबी और विपत्ति के समय भी अपना ईमान और धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे। उनके परिवार की स्थिति दयनीय थी, बच्चे भूख से तड़पते थे, किंतु उन्होंने कभी अपने आत्मसम्मान और धर्म से समझौता नहीं किया। कई दिनों तक जल पीकर ही जीवन यापन किया। अंततः पत्नी के आग्रह पर वे अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने चावल की पोटली लेकर द्वारिका पहुंचे।
कथा व्यास ने सुदामा की द्वारिका यात्रा के प्रसंग को अत्यंत भावुक शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मार्ग में उन्हें अनेक कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ा, किंतु उनके मन में न तो लोभ था और न ही कोई अपेक्षा। जैसे ही वे भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में पहुंचे, प्रभु ने उन्हें स्नेहपूर्वक गले लगाया। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रोता भावविभोर हो उठे और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि जो श्रद्धालु श्रद्धा एवं एकाग्र मन से भगवान की कथा का श्रवण करता है, उसे भगवान सद्गति प्रदान करते हैं। जिस प्रकार राजा परीक्षित और धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ, उसी प्रकार भागवत श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है।
इस अवसर पर अभिषेक त्रिपाठी, आशीष त्रिपाठी, अमित त्रिपाठी, डॉ. अनिरुद्ध त्रिपाठी, राम उजागर त्रिपाठी, राजेश कुमार त्रिपाठी, भाजपा जिला महामंत्री सुनील त्रिपाठी, श्रीमती कुसुम त्रिपाठी सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
