*श्री वृंदावनेश्वर हनुमान मंदिर में विशाल भंडारा, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद* 

*श्री वृंदावनेश्वर हनुमान मंदिर में विशाल भंडारा, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद*

दधीच विश्वकर्मा

कोइरीपुर (सुल्तानपुर)। नगर पंचायत कोइरीपुर स्थित श्री वृंदावनेश्वर हनुमान मंदिर परिसर में शनिवार को श्रावण मास के दौरान एक माह तक चले रामचरितमानस पाठ के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर के आचार्य रामटहल जी के सानिध्य एवं मंदिर के सौजन्य से आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्तिभाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया।

भंडारे का आयोजन 29 अगस्त 2026 को शाम चार बजे से प्रभु इच्छा तक किया गया। रामचरितमानस पाठ की पूर्णाहुति के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। जैसे-जैसे भंडारे की जानकारी क्षेत्र में पहुंची, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई।

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हनुमान के दर्शन-पूजन के बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।

भंडारे की खास बात यह रही कि पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाज के अनुरूप श्रद्धालुओं को जमीन पर पंक्तिबद्ध बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराया गया। सेवाभाव से जुड़े लोगों ने श्रद्धालुओं को भोजन परोसा और व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग किया। इस दौरान छोटे-बड़े सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि श्रावण मास में एक माह तक रामचरितमानस पाठ का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया था। पाठ के पूर्ण होने पर भगवान श्री हनुमान की कृपा एवं प्रभु इच्छा से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण और सेवा भाव को बढ़ावा देना रहा।

 

भंडारे में क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों और आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करने के साथ भगवान श्री हनुमान से सुख-समृद्धि एवं क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

 

मंदिर के आचार्य रामटहल जी और विजय शुक्ला की देखरेख में हुए इस आयोजन में मंदिर से जुड़े लोगों एवं श्रद्धालुओं ने सहयोग किया। भंडारे के समापन तक श्रद्धालुओं को श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित किया जाता रहा।

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