*सीआरपीएफ के पद पर तैनात हवलदार हलीम अहमद का हुआ निधन*
रिपोर्टर अशोक कुमार वर्मा
विधानसभा वा लम्भुआ थाना क्षेत्र के मदनपुर ग्राम पंचायत के निवासी हलीम अहमद पुत्र इश्तियाक अहमद जो सीआरपीएफ की 93वीं बटालियन आसियाना लखनऊ में तैनात थे।
जिनका हृदय गति रुक जाने के कारण आसमयिक निधन हो गया। हलीम अहमद हवलदार के पद पर करीब 35 वर्षों तक देश सेवा में समर्पित रहे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र एवं गांव में शोक की लहर दौड़ गई बताया जाता है कि उनका पार्थिव शरीर बीती रात उनके निज आवास मदनपुर लाया गया। शव घर पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे मृतक अपने पीछे पत्नी सबीहा खातून उर्फ गुड्डी सहित एक पुत्र सैफ लगभग 28 वर्ष एवं एक पुत्री शाहिस्ता लगभग 15 वर्ष को छोड़ गए हैं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी रही कि पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद भी लम्भुआ कोतवाली से सुबह लगभग 11:30 बजे तक कोई अधिकारी या पुलिसकर्मी शोक संवेदना व्यक्त करने नहीं पहुंचा।
हवलदार हलीम अहमद जो 93वीं बटालियन बटालियन में कार्यरत थे, अंतिम दर्शन पर सलामी देने के लिए बटालियन के श्री धर्मेंद्र कुमार असिस्टेंट कमांडेंट, इंस्पेक्टर जीडी रोहित कुमार शुक्ला, ए एस आई जी डी विजय कुमार सिंह, ए एस आई जी हरि शरण, हेड कांस्टेबल जीडी वसंत कुमार बहरा, प्रकाश चंद्र त्रिपाठी उदय सिंह पवन कुमार, सुभाष कुमार, विजय शंकर, चितरंजन दास,
अमन कुमार झा, गौरव कुमार एवं चालक दयाराम व सुरेश कुमार गोदारा हवलदार चालक सर्वजीत पांडे, अरुण कुमार मिश्रा द्वारा मिलकर दिवंगत हवलदार हलीम अहमद को जनाजे के साथ कब्रिस्तान तक जाया गया जहां पर पूरी बटालियन ने तिरंगे से लिपटे हलीम अहमद के पार्थिव शरीर के सामने दिवंगत हवलदार को सलामी दी तथा परिवारी जनों को इस दुख की घड़ी में पूरा सहयोग देने की बात कही। कोतवाली से हल्का दरोगा शुक्ला वा दो सिपाही सोनू वा सन्दीप भी जनाजे में शामिल होने के लिए पहुंचे। लेकिन किसी भी राजपत्रित अधिकारी नहीं पहुंचने पर बटालियन को तो दुःख हुआ ही जबकि बटालियन ने कोतवाली लम्भुआ आकर मौके की सूचना भी दी थी
