*बहरीपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव*
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संवाद: शिवपूजन मिश्रा*
सिंगरामऊ। क्षेत्र के बहरीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम एवं श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। इस दौरान कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का श्रवण करते रहे।
अयोध्या से पधारे साधु-संतों एवं महंतों के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रेम जायसवाल एवं उनकी धर्मपत्नी चंद्रकला जायसवाल ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत आनंद और आस्था का विषय है।
उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 5 अप्रैल से 12 अप्रैल तक किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन सायंकाल कथा वाचन हो रहा है।
कथा व्यास परम पूज्य महाराज डॉ. आनंद दास ने अपनी अमृत मयी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
उन्होंने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अवतरण से पूर्व ही अपने माता-पिता को बंधनों से मुक्त कर दिया था। इससे यह संदेश मिलता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान की शरण में जाकर भागवत कथा का श्रवण करता है, प्रभु उसे जीवन के सभी बंधनों से मुक्त कर सद्गति प्रदान करते हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य झांकी निकाली गई। इस दौरान महिलाओं ने सोहर गीत गाते हुए नृत्य किया तथा झांकी पर पुष्पवर्षा कर भगवान के जन्म की खुशियां मनाईं। भगवान के जन्म के समय पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।
महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति भाव से नृत्य-गान करने वाले भक्तों को 84 लाख योनियों में भटकना नहीं पड़ता। कार्यक्रम के अंत में भगवान की मंगल आरती की गई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर अयोध्या से पधारे साधु-संतों एवं महंतों ने भी जन्मोत्सव का भरपूर आनंद लिया और इसे परम सौभाग्य का क्षण बताया। वहीं मुख्य यजमान ने वसुदेव-देवकी के स्वरूप में स्वयं को धन्य महसूस किया।
