*राम कथा मंदाकिनी के समान, इसके श्रवण से जीवन होता है मंगलमय*
*माता-पिता और गुरु के यहां बिना बुलावे के जाना चाहिए:- धर्मराज महाराज*
*********************संवाद:शिवपूजन मिश्रा*
जौनपुर। सिगरामऊ क्षेत्र के महदा गांव में रामजी उपाध्याय के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास परम पूज्य धर्मराज महाराज ने श्रद्धालुओं को रामकथा का महत्व बताते हुए कहा कि रामकथा मंदाकिनी नदी के समान पवित्र और कल्याणकारी है। भगवान श्रीराम का नाम लेने मात्र से जीवन में मंगल ही मंगल दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने “राम” नाम का उल्टा जाप करते हुए भी ब्रह्मतुल्य ज्ञान प्राप्त किया और महान ऋषि बने। रामकथा चंद्रमा की शीतल किरणों के समान है, जिसका संत-महात्मा चकोर पक्षी की भांति रसपान करते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान राम के नाम की महिमा इतनी महान है कि शबरी, जटायु, गणिका और अजामिल जैसे भक्तों का भी उद्धार हो गया। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि माता-पिता एवं गुरु के यहां बिना बुलावे के भी श्रद्धा और सम्मान के साथ जाना चाहिए।
धर्मराज महाराज ने भगवान श्रीराम के विभिन्न अवतारों के कारणों और उनके आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में सराबोर होकर कथा का श्रवण किया।
महदा गांव निवासी रामजी उपाध्याय के यहां आयोजित यह श्रीराम कथा प्रतिदिन सायं 4 बजे से रात्रि 7.30 बजे तक सात दिनों तक चलेगी। मुख्य यजमान रामजी उपाध्याय ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण करने और धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
