माघ कृष्ण चतुर्थी पर आज संकष्टी गणेश चतुर्थी, शुभ योग में होगा व्रत-पूजन (अरविंद कुमार उपाध्याय)

*माघ कृष्ण चतुर्थी पर आज संकष्टी गणेश चतुर्थी, शुभ योग में होगा व्रत-पूजन (अरविंद कुमार उपाध्याय)*

*संवाद :शिवपूजन मिश्रा*

माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि पर आज संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत मंगलवार को प्रीति योग एवं सर्वार्थ अमृत सिद्ध योग के शुभ संयोग में रखा जा रहा है। चंद्रोदय रात्रि 8:45 बजे से 9:30 बजे के बीच होगा, जिसके पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है।

 

कर्मकांडी प्रकांड विद्वान अरविंद उपाध्याय के अनुसार इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। चंद्रोदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ एवं नए वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद खुले आसमान के नीचे गोबर से लीपकर चौक पूरा जाता है, जहां पूजन की समस्त सामग्री सजाई जाती है।

 

चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को लाल चंदन, कुश, दूर्वा, फूल, अक्षत एवं शमी पत्र आदि से तांबे के पात्र द्वारा अर्घ्य दिया जाता है। इस व्रत में गौर गणेश एवं चंद्रमा का विशेष पूजन किया जाता है। पूजन के दौरान भगवान गणपति को प्रत्येक वस्तु चार की संख्या में अर्पित की जाती है। इसमें लाल कंद, फल, गुड़, तिल्ली, पान एवं तिल प्रमुख हैं। साथ ही गुड़, तिल और घृत की आहुति दी जाती है।

 

चार बत्तियों वाले दीपक के साथ कपूर से आरती की जाती है तथा गणेश जी की चार कथाएं कही और सुनी जाती हैं। काले तिल, जल और फूल हाथ में लेकर चार बार प्रदक्षिणा करते हुए अर्घ्य देने का विधान बताया गया है।

 

इस व्रत में गुड़, तिल और लाल कंद का विशेष महत्व है। पूजन के पश्चात सिंघाड़े का हलवा, कंद, दूध एवं चाय आदि का फलाहार किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जिन परिवारों में मंगल कार्य या संतान जन्म हुआ होता है, वहां गुड़-तिल का ‘पहाड़’ बनाकर सुबह पूरे गांव में प्रसाद वितरण की परंपरा भी निभाई जाती है।

 

धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने से समस्त संकटों से मुक्ति मिलती है, विघ्न-बाधाओं का निवारण होता है तथा परिवार में धन-धान्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। महिलाएं विशेष रूप से अपने पुत्रों की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।

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