जौनपुर, उत्तर प्रदेश
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जौनपुर

राम वनगमन की लीला देख भावुक हुए दर्शक, कैकेयी-मंथरा संवाद बना आकर्षण का केंद्र

पिता की आज्ञा मानकर वन चले राम, लक्ष्मण के क्रोध और सीता के त्याग ने दर्शकों को किया भावविभोर

सिकरारा । क्षेत्र के खानापट्टी गांव में आदर्श रामलीला समिति के तत्वावधान में रविवार की रात राम वनगमन लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ-कैकेयी के बीच करुण प्रसंग और राम-केवट संवाद ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय और मार्मिक दृश्यों के दौरान रामलीला पंडाल में कभी सन्नाटा छाया तो कभी जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे।

लीला का शुभारंभ राजमहल में कैकेयी और उसकी दासी मंथरा के संवाद से हुआ। मंथरा की भूमिका में गौरव सिंह ने अपने अभिनय से कैकेयी को भरत के राजतिलक और राम को वनवास दिलाने के लिए उकसाने का दृश्य जीवंत कर दिया। वहीं, कैकेयी बने हर्षित सिंह ने कोप भवन में जाकर राजा दशरथ से अपनी मांग मनवाने की जिद का प्रभावशाली अभिनय किया। कैकेयी के इस व्यवहार को देखकर दर्शकों में आक्रोश का भाव दिखाई दिया।

इसके बाद दशरथ-कैकेयी संवाद का मंचन हुआ। राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे सुनील सिंह ने पुत्र राम को वनवास भेजने की बात सुनकर व्याकुल पिता की पीड़ा को अपने अभिनय के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया। पुत्र वियोग की आशंका और कैकेयी की हठ के बीच दशरथ का विलाप देखकर पंडाल में मौजूद दर्शक भावुक हो उठे।

पिता की आज्ञा मान वन को चले राम

दूसरे दृश्य में राम के राजतिलक की तैयारियों के बीच उनके वनवास की सूचना मिलने का प्रसंग दिखाया गया। राम की भूमिका निभा रहे सत्या सिंह ने पिता की आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर मर्यादा, त्याग और आज्ञापालन का संदेश दिया। लक्ष्मण बने शिवम सिंह ने अपने बड़े भाई के प्रति प्रेम और वनवास के निर्णय पर क्रोध का सजीव चित्रण किया। वहीं, सीता की भूमिका में कृष्णा सिंह ने पति राम के साथ वन जाने के संकल्प को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। तीनों पात्रों के अभिनय ने दर्शकों को रामकथा के भावनात्मक पक्ष से जोड़ दिया।

राम-केवट संवाद पर गूंजे जयकारे

लीला के अंतिम चरण में गंगा तट पर राम और केवट के मिलन का दृश्य प्रस्तुत किया गया। केवट की भूमिका निभा रहे संजय सिंह ने भगवान राम के चरण पखारे बिना नाव पर न चढ़ाने की जिद का मनोहारी अभिनय किया। इस दौरान 'नाहीं नाव चढ़ाइहौं जब लगि न पग धोइहौं' भजन पर कलाकार की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। दर्शकों ने तालियों और जय श्रीराम के जयकारों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

अंत में केवट द्वारा भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को नाव से गंगा पार कराने के दृश्य के साथ लीला का समापन हुआ। पूरी प्रस्तुति में कलाकारों ने रामकथा के आदर्शों, पारिवारिक संबंधों, त्याग और भक्ति को मंच पर साकार किया।