कलवारी गांव में श्रद्धापूर्वक मनाई गई पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह की 79वीं जयंती
पैतृक गांव स्थित डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा, वैज्ञानिक योगदान को किया गया याद
मंगेश कन्नौजिया
सिकरारा,।
‘डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक’ और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह की 79वीं जयंती रविवार को उनके पैतृक गांव कलवारी स्थित डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लेकर महान वैज्ञानिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. लालजी सिंह के भतीजे एवं संस्थान के प्रबंध निदेशक आशीष सिंह की देखरेख में किया गया। उपस्थित लोगों ने डॉ. सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. लालजी सिंह ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से भारत को वैश्विक वैज्ञानिक पहचान दिलाई। उनके शोध कार्यों ने अपराध अनुसंधान, न्यायिक प्रक्रिया, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की।
वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले डॉ. लालजी सिंह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए जो योगदान दिया, उसे देश कभी नहीं भुला सकता। उनके आदर्शों और कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया। इस मौके पर प्राचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत शिक्षक लल्लन उपाध्याय,शरद सिंह प्रधानाचार्य,सुशील सिंह प्रधान प्रतिनिधि, आकाश मिश्र डॉ शोभनाथ यादव
धर्मेंद्र यादव अरुण कुमार अजय विश्वकर्मा राजेश यादव प्रकाश सिंह रमेश प्रशांत सिंह दिनेश संतोष अवनीश आदि सक्रिय रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने उनके बताए मार्ग पर चलने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज में बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
