*मछलीशहर तहसील में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का असर*
*तहसील प्रशासन ने जारी किया सख्त निर्देश, कंप्यूटरीकृत खतौनी की प्रति निर्धारित15 रुपए लिए जाने की मांग*
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*संवाद:माता चरण पांडे*
मछलीशहर तहसील में अधिवक्ताओं द्वारा चलाए जा रहे नौ दिवसीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का असर अब प्रशासनिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। तहसीलदार रवि रंजन कश्यप ने 22 अप्रैल की शाम सभी न्यायालयों और कार्यालयों के बाहर एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी कर आम जनता को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
जारी नोटिस में बताया गया है कि तहसील में आय, जाति, निवास, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र तथा दाखिल-खारिज सहित किसी भी सेवा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है। साथ ही, तहसील परिसर में बिचौलियों और दलालों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रशासन ने वादकारियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने कार्यों के लिए सीधे संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। यदि कोई कर्मचारी अवैध रूप से पैसे की मांग करता है, तो इसकी शिकायत सीधे तहसीलदार को दूरभाष के माध्यम से की जा सकती है।
इस पहल का अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया गया, तो गरीब और जरूरतमंद लोगों को काफी राहत मिलेगी। अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई है कि कंप्यूटरीकृत खतौनी की प्रति के लिए निर्धारित 15 रुपये से अधिक, यानी 20 रुपये की वसूली पर रोक लगाई जाए।
तहसीलदार रवि रंजन कश्यप ने चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार की किसी भी शिकायत पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि हड़ताल के दौरान किसी भी अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र पर इंडोर्समेंट नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इन कदमों के बावजूद अधिवक्ता अपने रुख पर कायम हैं और तहसीलदार के स्थानांतरण तक न्यायिक कार्य से दूर रहने का निर्णय नहीं बदला है। इस क्रम में गुरुवार को अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी मांगों को रखेगा।
