*टीबी को जड़ से मिटाने का संकल्प:*
*सतर्कता और सही पोषण ही बचाव की कुंजी — डॉ. अंजू सिंह*
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*संवाद :शिवपूजन मिश्रा*
सिंगरामऊ स्थित ठाकुर बाड़ी महिला विकास कल्याण समिति के परियोजना कार्यालय में “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूक कर समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करना रहा।

मुख्य अतिथि एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल सिंह ने कहा कि तीन सप्ताह से अधिक खांसी, शाम को बुखार, वजन में कमी या बलगम में खून आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सरकारी केंद्र पर जांच कराएं। उन्होंने बताया कि टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है और निक्षय पोर्टल के माध्यम से मरीजों की निगरानी की जाती है। निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। दवा का कोर्स बीच में छोड़ना खतरनाक है, इससे MDR-TB का खतरा बढ़ सकता है।

डॉ. सलिल ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग लैटेंट टीबी संक्रमण से प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन संक्रमण का अर्थ बीमारी नहीं है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर ही बीमारी सक्रिय होती है।

संस्था की सचिव डॉ. अंजू सिंह ने कहा कि “टीबी को जड़ से मिटाने का संकल्प” जन-जागरूकता और सतर्कता से ही पूरा होगा। टीम लीडर महेन्द्र कुमार ने सही पोषण को टीबी से लड़ाई का आधार बताते हुए दाल, सोयाबीन, मूंगफली व डेयरी उत्पादों के सेवन पर जोर दिया।
कार्यक्रम में लोकगायक रंग बहादुर यादव और कवि राम इकबाल यादव ‘ढेमा’ ने गीत व कविता के माध्यम से टीबी के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। अंत में 200 क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई और सभी से ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान में सहयोग की अपील की गई।
