*सर्पदंश से 12 वर्षीय बच्चे की दर्दनाक मौत, झाड़-फूंक में गंवाया कीमती समय*
*सिगरामऊ थाना क्षेत्र के बहरीपुर बाजार की घटना, परिजनों में मचा कोहराम*
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*संवाद :शिवपूजन मिश्रा*
बदलापुर/सिगरामऊ। सिगरामऊ थाना क्षेत्र के बहरीपुर बाजार में सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना में 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। मृतक की पहचान रितेश पुत्र राजेश टेलर के रूप में हुई है। बताया गया कि रितेश कक्षा तीन का छात्र था। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं पूरे बाजार और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, रितेश को सर्प ने काट लिया था। परिजनों ने सर्प की पहचान और रेस्क्यू के लिए सर्प मित्र नीरज पांडे को बुलाया, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर सर्प का रेस्क्यू किया।
बताया जाता है कि सर्पदंश के बाद परिजन बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए। पहले उसे मिरसादपुर स्थित रामचंद्र विश्वकर्मा के पास ले जाया गया। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए वहां से तत्काल बीएस उपाध्याय के यहां ले जाने की सलाह दी गई। परिजन बच्चे को लेकर वहां पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन आत्मसंतोष के लिए बच्चे को बीएस उपाध्याय के यहां ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मृतक के पिता राजेश टेलर सिलाई का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।
झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता को सामने ला दिया है। लोगों का कहना है कि जागरूकता और लगातार दिशा-निर्देशों के बावजूद कई लोग सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक में समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्पदंश के उपचार के लिए अस्पतालों में एंटी-वेनम उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में सर्पदंश होने पर बिना समय गंवाए पीड़ित को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार, यदि बच्चे को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता और आवश्यक उपचार मिल जाता, तो संभवतः उसकी जान बच सकती थी।
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच सर्पदंश के प्रति जागरूकता और तत्काल चिकित्सकीय उपचार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यह घटना लोगों के लिए एक सबक है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
