*रक्षाबंधन पर पुलिस की सजगता ने बचाई 11 वर्षीय मासूम की राह*
*सुनसान हाईवे पर अकेली भटक रही बच्ची को कोबरा टीम ने सकुशल थाने पहुंचाया, परिजनों से मिलाया*
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*संवाद: शिवपूजन मिश्रा*
जौनपुर। सिंगरामऊ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जौनपुर द्वारा अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी बदलापुर के कुशल पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार मौर्य के नेतृत्व में थाना स्थानीय पुलिस द्वारा रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर मानवीय संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की गई।
दिनांक 28 अगस्त 2026 को थाना स्थानीय से कोबरा प्रथम के कर्मचारी का० सतीश कसौधन एवं का० रजत पाण्डेय द्वारा हाईवे पर गश्त की जा रही थी। इसी दौरान रात्रि करीब 01:50 बजे उनकी नजर हाईवे के किनारे एक लगभग 11 वर्षीय बच्ची पर पड़ी, जो काफी घबराई और परेशान दिखाई दे रही थी।
सुनसान हाईवे पर इतनी रात में अकेली बच्ची को देखकर दोनों पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसके पास पहुंचकर नम्रता से उसका हालचाल पूछा तथा वहां मौजूद होने का कारण जानना चाहा। पुलिसकर्मियों को अपने पास देखकर बच्ची रोने लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों कर्मचारियों ने तत्काल थाना स्थानीय को सूचना दी।
सूचना मिलते ही थाने पर जनसुनवाई ड्यूटी पर तैनात म०का० वांदनी को मौके पर भेजा गया। महिला आरक्षी की सुपुर्दगी में बच्ची को सुरक्षित थाना स्थानीय लाया गया। यहां बच्ची से शालीनता एवं संवेदनशीलता के साथ पूछताछ की गई।
पूछताछ में बच्ची ने अपना नाम रिया निषाद पुत्री जियालाल निषाद, निवासी ग्राम सोनावां, थाना चांदा, जनपद सुल्तानपुर बताया। बच्ची ने बताया कि उसकी मां रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई को राखी बांधने के लिए पिता के साथ बाइक से घर से बदलापुर चली गई थीं और उसे साथ नहीं ले गई थीं। वह भी उनके साथ जाना चाहती थी, जिसके कारण वह बिना किसी को बताए घर से पैदल ही निकल पड़ी।
हाईवे पर काफी दूर तक पैदल आने के बाद बच्ची थक गई तथा उसे भूख-प्यास लगने लगी। सुनसान रास्ते पर डर के कारण वह रोने लगी। इसी दौरान उसे पुलिसकर्मी दिखाई दिए, जिन्होंने तत्काल उसकी मदद की और सुरक्षित थाने लेकर आए।
पुलिस द्वारा बच्ची के माता-पिता से दूरभाष संख्या 9795219574 पर संपर्क किया गया। उन्हें थाना स्थानीय बुलाया गया और आवश्यक पूछताछ एवं पहचान के उपरांत बच्ची रिया निषाद को सकुशल उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
रात के सन्नाटे में जब मासूम की आंखें नम थीं,
खाकी के साए में उसे फिर अपनों की उम्मीद मिली।
रिश्तों के इस पावन पर्व पर पुलिस ने फर्ज निभाया,
भटकी हुई बिटिया को सकुशल उसके घर पहुंचाया।
