भागवत कथा श्रवण से प्रेत योनि से भी मिलती है मुक्ति : धर्मराज महाराज
शिव पूजन मिश्र
सिगरामऊ (जौनपुर)। क्षेत्र के डंडारी ग्राम पंचायत में मुख्य यजमान वंशगोपाल दादा के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस कथा व्यास धर्मराज महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत महात्म्य का महत्व बताया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
अपने प्रवचन में धर्मराज महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा और भक्ति भाव से श्रवण करने से प्रेत योनि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने भगवान के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान सत्य, चित और आनंद के स्वरूप हैं तथा भागवत कथा मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।

भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए उन्होंने धुंधकारी के मोक्ष का प्रसंग सुनाया और ज्ञान, वैराग्य तथा भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसे तोता केवल पके और मीठे फल का ही रस ग्रहण करता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा भी जीवन को मधुर और कल्याणकारी बनाने वाली है।
कथा के दौरान धर्मराज महाराज ने राजा परीक्षित और कलियुग के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा परीक्षित द्वारा धारण किया गया स्वर्ण मुकुट परिश्रम की कमाई का नहीं था, इसलिए उसमें कलियुग का प्रवेश संभव हुआ। उन्होंने कहा कि मेहनत की कमाई से अर्जित धन और उससे खरीदे गए स्वर्ण में कलियुग का वास नहीं होता।
प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे और कथा समाप्ति पर भगवान के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
इस अवसर पर राजकुमार उपाध्याय, धीरज, टिंकू, ऋतिक, आदर्श, उत्कर्ष, राहुल श्रीवास्तव, प्रदीप विश्वकर्मा, आशीष मिश्र, विमल मिश्र, रामजी पाठक, देवता मिश्र, शिवाजी शुक्ला, संतोष शुक्ला, हृदय नारायण, राकेश प्रसाद मिश्र, प्रेम सागर मिश्र, रामजी उपाध्याय, कल्लू सिंह, सत्यदेव सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
