श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा भक्ति का सागर, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

*श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा भक्ति का सागर, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह झांकी बनी आकर्षण का केंद्र*

*लक्ष्मी सदैव श्री हरि विष्णु के साथ रहती हैं (विमलेश महाराज)*

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*संवाद: माता चरण पांडे*

बरईपार क्षेत्र के सकरा ग्राम पंचायत में यजमान चंद्रकांत पांडे के यहां आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास परम पूज्य विमलेश महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और गोपी प्रेम के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

 

उन्होंने श्रीकृष्ण के बालपन, माखन चोरी, पूतना वध, कालिया नाग मर्दन तथा गोवर्धन पर्वत धारण कर इंद्र के अभिमान को चूर करने की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही गोपियों के निस्वार्थ प्रेम और महारास की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

 

कथा के दौरान कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर भव्य झांकी निकाली गई, जिसमें हरिनाम संकीर्तन, गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पुरुष भक्तों ने नृत्य कर उत्सव का आनंद लिया। आचार्य सोनू मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संस्कार संपन्न कराया, वहीं यजमान परिवार ने भगवान के चरण पखारकर विधिवत पूजन किया।

 

अपने प्रवचन में विमलेश महाराज ने कहा कि समय के साथ विवाह की परंपराओं में बदलाव आया है, लेकिन सनातन संस्कृति की मूल भावना आज भी अक्षुण्ण है। उन्होंने कहा कि जहां सुमति और भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा होती है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है, जबकि अहंकार और अधर्म के स्थान पर लक्ष्मी नहीं ठहरतीं।

 

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ प्रवचन को आत्मसात किया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में शशिकांत पांडे, पंडित मार्कंडेय पांडे, श्रवण कुमार, रमेश चंद्र, चंद्रप्रकाश, वाचस्पति पांडे, राहुल पांडे, आशुतोष, मनीष कुमार, मुन्ना पांडे और कलेक्टर पांडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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