*सुल्तानपुर : गोलाघाट के डॉक्टर की कथित लापरवाही से महिला की हालत गंभीर, दिव्यांग होने का मंडराया खतरा*

*सुल्तानपुर : गोलाघाट के डॉक्टर की कथित लापरवाही से महिला की हालत गंभीर, दिव्यांग होने का मंडराया खतरा*

*सुल्तानपुर जिलाधिकारी को दो बार शिकायती पत्र देने के बावजूद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही “पीड़ित”

अनिल मिश्र

सुल्तानपुर। प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के पूरे दलपत शाह गांव निवासी पत्रकार सूरज वर्मा की पत्नी के साथ कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि सुल्तानपुर के गोलाघाट स्थित एक निजी अस्पताल में पैर की नस में ब्लॉकेज का ऑपरेशन कराने के बाद महिला की हालत में सुधार होने के बजाय समस्या और गंभीर हो गई। पीड़िता पिछले करीब तीन महीनों से बिस्तर पर हैं और परिजनों ने उनके स्थायी रूप से दिव्यांग होने की आशंका जताई है मामले को लेकर पीड़ित पति ने सुल्तानपुर के जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

*17 मई को हुई थी सर्जरी*

प्राप्त जानकारी के अनुसार पत्रकार सूरज वर्मा की करीब 40 वर्षीय पत्नी कंचन वर्मा के बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज की समस्या थी। बेहतर उपचार की उम्मीद में परिजन उन्हें गोलाघाट स्थित सुल्तानपुर हॉस्पिटल एंड ऑर्थो सेंटर, सिविल लाइन-2 ले गए। परिजनों के मुताबिक वहां चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार पांडे ने ऑपरेशन के बाद महिला के पूरी तरह स्वस्थ होने का भरोसा दिया। डॉक्टर के आश्वासन पर परिजनों ने 16 मई 2026 को महिला को अस्पताल में भर्ती कराया और 17 मई को उनकी सर्जरी कराई गई। 19 मई को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

*₹1.60 लाख लेने का आरोप, ₹59 हजार की रसीद*

पीड़ित पति का आरोप है कि ऑपरेशन, अस्पताल के खर्च और दवाइयों के नाम पर उनसे कुल 1.60 लाख रुपये लगभग नकद लिए गए। हालांकि अस्पताल की ओर से केवल 59 हजार रुपये की रसीद दी गई। परिजनों के अनुसार रसीद में ऑपरेशन शुल्क, डॉक्टर फीस, बेड और नर्सिंग चार्ज का उल्लेख है, जबकि शेष रकम तथा महंगी दवाइयों और इंजेक्शनों के संबंध में उन्हें कोई बिल या रसीद नहीं दी गई परिवार का आरोप है कि पूरा भुगतान नकद में लिया गया और डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से परहेज किया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

*तीन महीने बाद भी दर्द से बेहाल*

परिजनों का कहना है कि डिस्चार्ज के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों और निर्देशों का पालन किया गया, लेकिन करीब तीन महीने बीतने के बावजूद महिला की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। वर्तमान में वह बिना सहारे चलने-फिरने में असमर्थ हैं और लगातार तेज दर्द से परेशान हैं। परिवार के मुताबिक, जब वे दोबारा चिकित्सक से परामर्श लेने पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया कि समय के साथ महिला ठीक हो जाएंगी। लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अब परिवार ने प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

*डीएम से जांच और इलाज की मांग*

शिकायती पत्र में पीड़ित पति ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, अस्पताल द्वारा कथित रूप से बिना रसीद लिए गए भुगतान एवं वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है साथ ही पीड़िता को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में समुचित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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