*पाकिस्तान में बंद सात भारतीय मछुआरों की रिहाई की बढ़ी उम्मीद, नागरिकता सत्यापन और कांसुलर एक्सेस पूरा*
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*अरुण कुमार जायसवाल (जिला ब्यूरो)*
मछली शहर।जौनपुर/नई दिल्ली। पाकिस्तान की जेलों में बंद सात भारतीय मछुआरों की जल्द रिहाई और सुरक्षित स्वदेश वापसी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी मछुआरों को कांसुलर एक्सेस उपलब्ध करा दिया गया है तथा उनकी भारतीय नागरिकता का सत्यापन भी पूरा हो चुका है।
विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान प्रभाग के अवर सचिव अभिषेक गोयल ने 31 जुलाई 2026 को भदोही के सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद को भेजे पत्र में बताया कि भारत सरकार पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से मछुआरों की सुरक्षा, कानूनी सहायता, कल्याण और शीघ्र रिहाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। पत्र में कहा गया है कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारी नियमित रूप से जेलों का दौरा कर बंद भारतीय नागरिकों से मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ने 1 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के समक्ष भारतीय कैदियों, विशेषकर मछुआरों, की तत्काल रिहाई और सुरक्षित स्वदेश वापसी का मुद्दा एक बार फिर मजबूती से उठाया था।
जानकारी के मुताबिक, ये सभी मछुआरे 3 दिसंबर 2021 को गुजरात गए थे। 8 फरवरी 2022 को समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान अनजाने में पाकिस्तान की समुद्री सीमा में प्रवेश कर गए, जिसके बाद पाकिस्तानी नौसेना ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बंद मछुआरों में मछलीशहर विकासखंड के बसिरहा-नंदापुर निवासी सुरेश बिंद, लालमणि बिंद, विनोद कुमार और नीरज बिंद, सुल्तानपुर निवासी राजनारायण एवं संभाराज तथा भदोही निवासी राजनाथ शामिल हैं।
कांसुलर एक्सेस मिलने और नागरिकता सत्यापन पूरा होने की जानकारी के बाद मछुआरों के परिजनों में खुशी का माहौल है। सुरेश बिंद की पत्नी अनीता और लालमणि बिंद की पत्नी कुसुम ने उम्मीद जताई है कि उनके परिजन जल्द सकुशल भारत लौटेंगे।
गौरतलब है कि इन्हीं मछुआरों के साथ बसिरहा-नंदापुर निवासी घुरहू बिंद भी पाकिस्तान की जेल में बंद थे। लगभग एक वर्ष पहले जेल में उनकी मृत्यु हो गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रयासों से उनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया, जिसके बाद जौनपुर के रामघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
