चांदा में श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा रुक्मणी विवाह, प्रेम और भक्ति का दिया संदेश
चांदा/सुल्तानपुर। स्थानीय कस्बे में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन अयोध्या से पधारे भागवताचार्य डॉ. सुनील तिवारी वेदांती ने कंस वध, जरासंध वध, भ्रमर गीत और रुक्मणी विवाह प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति और भाव में सराबोर नजर आए।
कथा व्यास ने कहा कि परमात्मा को समझने का मार्ग ज्ञान है, लेकिन उन्हें प्राप्त करने और अनुभव करने का माध्यम प्रेम है। उन्होंने कहा कि ज्ञान से भगवान को जाना जा सकता है, जबकि प्रेम से उन्हें बांधा जा सकता है। भ्रमर गीत प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने गोपियों और उद्धव संवाद का वर्णन किया तथा बताया कि गोपियों के निष्कलंक प्रेम ने उद्धव को भी भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रेम में त्याग और समर्पण की भावना होती है, प्रतिदान की अपेक्षा नहीं। सच्चा प्रेम व्यक्ति के हृदय को परिवर्तित कर सकता है। यदि समाज में प्रेम और समर्पण की भावना विकसित हो जाए तो आतंकवाद, उग्रवाद और अनेक सामाजिक बुराइयों का अंत स्वतः संभव है।
रुक्मणी विवाह प्रसंग के दौरान कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इससे पूर्व मुख्य यजमान राम पाल दुबे ने आचार्य राहुल तिवारी के साथ व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर आरती की।
इस अवसर पर राजा बाबू दुबे, हर्षनारायण पांडेय, जटा शंकर मिश्र, राम अभिलाख मिश्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण किया। महिलाओं ने भी श्रद्धाभाव से रुक्मणी विवाह प्रसंग में सहभागिता निभाते हुए भेंट अर्पित की।
