निर्जला एकादशी व्रत कथा का आयोजन, श्रद्धालुओं ने रखा उपवास ….पंडित अरविन्द उपाध्याय
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी के अवसर पर क्षेत्र के मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और व्रत का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की तथा सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशियों के समान पुण्य प्रदान करता है। इस अवसर पर कथा वाचन में बताया गया कि महाभारत काल में ने महर्षि के निर्देश पर यह व्रत रखा था, जिसके कारण इसे “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाता है।
मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने भगवान का अभिषेक, पूजन एवं भजन-कीर्तन किया। कई स्थानों पर शरबत, जल एवं फल वितरण के साथ सेवा कार्य भी आयोजित किए गए।
वक्ताओं ने कहा कि निर्जला एकादशी आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। इस व्रत के माध्यम से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ समाज में सेवा और परोपकार की भावना को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की आरती कर विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति और जनकल्याण की प्रार्थना की।
