*डॉक्टर विहीन जमऊपट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दवा तक नहीं*
*क्षेत्रीय लोगों ने सीएमओ से की चिकित्सक व एंटी वेनम की मांग*
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*संवाद :शिवपूजन मिश्रा*
सिगरामऊ (जौनपुर)। सिगरामऊ क्षेत्र के अंतर्गत स्थित जमऊपट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टर विहीन होने के कारण केवल नाम का अस्पताल बनकर रह गया है। जनपद मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर और जिले की सीमा पर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में न तो स्थायी चिकित्सक की तैनाती है और न ही आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, जिससे क्षेत्रीय ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में अस्पताल में केवल एएनएम मीरा देवी और वार्ड बॉय मोने अली कार्यरत हैं। प्रसव के लिए मरीज आने पर चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण एएनएम को भी असहाय स्थिति का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में सामान्य बुखार की दवा पैरासिटामोल तक उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ समय पूर्व फार्मासिस्ट श्रीराम यादव की सप्ताह में तीन दिन के लिए अस्थायी नियुक्ति हुई थी। इससे लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन एक-दो महीने बाद उन्हें बदलापुर से संबद्ध कर दिया गया। उनके जाने के बाद अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं फिर से ठप हो गईं।
अस्पताल में सप्ताह में एक दिन मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला आयोजित होता है, लेकिन चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में मरीजों की संख्या भी कम रहती है। बरसात के मौसम में संक्रामक और मौसमी बीमारियों के साथ-साथ सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में अस्पताल में एंटी वेनम जैसी जीवनरक्षक दवा का न होना क्षेत्रीय लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है।
इस अस्पताल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रधान एवं प्रवक्ता पारसनाथ शुक्ला ने कहा कि उन्होंने इस अस्पताल के निर्माण में इसलिए सहयोग किया था ताकि सीमावर्ती और दूरस्थ गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल की वर्तमान स्थिति उनकी अपेक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है और वर्षों बाद भी यहां समुचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
