“धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए वीरता व साहस आवश्यक : राम कृष्ण उपाध्याय”
“जब तुम्हारे हाथ कांपेंगे समर में, तब धरा पर धर्म का भी नाश होगा” — ओजस्वी कविता से युवाओं में भरा जोश
शिव पूजन मिश्र
स्थानीय सभागार में आयोजित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम में वक्ता ने युवाओं को राष्ट्र, समाज और धर्म की रक्षा के लिए सदैव साहसी एवं कर्तव्यनिष्ठ रहने का संदेश दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ओजपूर्ण पंक्तियाँ सुनाईं—
> “जब तुम्हारे हाथ कांपेंगे समर में,
तब तुम्हारी वीरता का ह्रास होगा।
तब तुम्हारी ही नहीं होगी पराजय,
तब धरा पर धर्म का भी नाश होगा।”
इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान होते हैं। यदि समाज का युवा अपने कर्तव्य से पीछे हटेगा तो केवल उसकी ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भी हानि होगी।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने वक्ता के विचारों का स्वागत किया तथा युवाओं से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सदैव आगे आने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों ने वक्ता का स्वागत एवं सम्मान भी किया।
