*सूर्यों उपासना डाला छठ महापर्व नहाय- खाय के साथ हुआ शुरू, पूजा के सामानों की सजी दुकाने सरोवरों व नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढी*

*सूर्यों उपासना डाला छठ महापर्व नहाय- खाय के साथ हुआ शुरू, पूजा के सामानों की सजी दुकाने सरोवरों व नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढी*

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अरुण कुमार जायसवाल

 

*जिला संवाददाता तीखी आवाज 24.in जौनपुर*

सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ मंगलवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। इस चार दिवसीय पर्व का समापन 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। शहर भर के बाजारों में छठ पूजा के उपयोग में आने वाली आवश्यक सामग्री सूप, दउरा, नया चावल, गुड़ आदि की दुकानें सजी हैं। पूजन सामग्री खरीदने के लिए भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है।

बाजारों में छठ की रौनक कोतवाली चौराहा, सब्जी मंडी, स्टेशन रोड, ओलंदगंज और सिपाह जैसे प्रमुख स्थानों पर अस्थाई दुकानें लगाई गई हैं, पर्व को देखते हुए नदियों और तालाबों के घाटों की विशेष साफ-सफाई की गई है, ताकि श्रद्धालु पूजा विधि को शुद्ध रूप में संपन्न कर सके। मान्यता के अनुसार श्रद्धालु नए चूल्हों का निर्माण कर उस पर प्रसाद बनाते हैं। सूर्योपासना के महत्त्व को पुराणों में भी दर्शाया गया है। सूर्य नारायण की पूजा करने से साधक को समस्त इच्छित फलों की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से स्नान, और सुगंधित फूलों से अर्घ्य देने से भक्तजन पुण्यफल प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि चंदन और जल के साथ अर्घ्य देने पर साधक को पुत्र-पत्नी के साथ स्वर्ग लोक में प्रतिष्ठा मिलती है। पूर्वी प्रदेशों से इस त्यौहार की शुरुआत होकर इस समय यह त्योहार पूरे देश में आस्था का प्रतीक बना हुआ है।घाटों पर किसी प्रकार की कोई दुर्घटना ना हो प्रशासन ने घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था भी की है। जौनपुर शहर में आदि गंगा गोमती नदी के तट पर आसपास के घाटों पर प्रशासन द्वारा बिजली व साफ सफाई की विधिवत व्यवस्था की गई है। इस त्यौहार की महिमा तब और बढ़ जाती है जब महिलाएं छठ मैया के गीत गाती हुई उगते सूर्य को अर्घ देने के लिए बड़े भोर से ही एक तपस्वी की तरह नदी या जलाशयो में कमर तक जल में खड़ी होकर उगते भगवान भास्कर का इंतजार करती है।

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