पंडित राजबली उपाध्याय जी की पांचवीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि
जौनपुर । समाजसेवा, न्यायप्रियता और गरीबों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले स्मृतिशेष पंडित राजबली उपाध्याय जी की पांचवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाई गई। इस अवसर पर परिवारजनों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
परिवार की ओर से कहा गया कि संसार में आवागमन प्रकृति की सतत प्रक्रिया है, लेकिन कुछ लोग अपने सद्कर्मों और सामाजिक सरोकारों के कारण जनमानस के दिलों में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पंडित राजबली उपाध्याय जी का जीवन भी ऐसा ही प्रेरणादायी रहा। उन्होंने आजीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब, शोषित, दमित और असहाय लोगों के हक और अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा हमेशा उनके साथ खड़े रहे।
बताया गया कि आपातकाल के दौरान शहर में मास्टर प्लान के तहत लोगों के घर गिराए जा रहे थे। उस समय नियम-कानून को लेकर अधिकारियों से उनकी तीखी बहस हुई और उन्होंने आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से आवाज उठाई। अंततः मास्टर प्लान को रोकना पड़ा। उनके समकालीन लोग आज भी उनके साहस और न्यायप्रियता के अनेक किस्से याद करते हैं।
पंडित राजबली उपाध्याय जी ने गरीबों और मजलूमों को उनका हक दिलाने के लिए बड़े-बड़े दबंगों और माफियाओं का भी डटकर विरोध किया। कोविड काल में भी उन्होंने जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्यान्न और राशन की व्यवस्था कर मानवता की मिसाल पेश की।
उनका व्यक्तित्व राजशाही ठाठ-बाट, आत्मसम्मान और न्यायप्रियता से परिपूर्ण था। वे खाने-खिलाने और सादगीपूर्ण जीवन के शौकीन थे। स्वाभिमान की रक्षा के लिए वे कभी पीछे नहीं हटे। जिद में कठोर लेकिन हृदय से अत्यंत सरल, कोमल और निष्कलुष थे।
परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें अपनी ऐसी महान विभूति की संतान होने पर गर्व है और वे उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर परिवारजनों ने अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर परिवार द्वारा वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां रह रहे बुजुर्गों के साथ समय बिताया गया। बुजुर्गों का सम्मान करते हुए उन्हें आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई। इस सेवा कार्य से परिवारजनों को आत्मसंतुष्टि और सुखद अनुभूति प्राप्त हुई।
